Saturday, 24 October 2015

Jalwa....

Jalwaa
Tanhaaiyon mein jo simtaa thaa ishq,
Teri berukhi ki ibaadat ka kamaal thaa..

Kutartaa thaa khud ke ehsaason ko,
Sangdili kaa fir bhi mujhse misaal thaa..

Mai gumshudaa rahaa labon ki giraft mein,
Thi Maayusi yateem aisa mera jalaal thaa..

Tu de tohmaton ki duaayen behisaab,
Zindagi kyu chand rahi yahi malaal thaa..

©Abhilekh

Friday, 16 October 2015

बदलते वक़्त...

आज ज़माने में हर किसी के अंदाज़ बदले हैं..
कोई नज़र-अंदाज़ है तो कोई मसरूफ़ियत में बदले हैं..

सब अपनी अहमियत से बखूबी वाकिफ़ हैं..
इस मिजाज़ में सब एक दूजे से मिले बगैर बदले हैं..

इंसान हूँ और तमाम जद्दोजहद है ज़हन में..
इस खुमारी में हर किसी के तेवर बदले हैं..

2 घडी बेवफ़ाई को तू भी आज़मा ले ऐ साक़ी..
यहाँ तो हमराज़ ने भी कई बिस्तर बदले हैं...!!

Aaj zamaane mein har kisi ke andaaz badle hain..
Koi nazar-andaaz hain to koi masrufiyat mein badle hain..

Sab apni ahmiat se bakhubi waaqif hain..
Is mijaaz mein sab ek duje se mile bagair badle hain..

Insaan hun aur tamaam jaddojahad hai zehan mein..
Is khumaari mein har kisi ke tevar badle hain..

2 ghadi bewafayi ko tu bhi aazmaa le ae saaqi..
Yahaan to humraaz ne bhi kai bistar badle hain..!

#Abhilekh

Tuesday, 13 October 2015

एक सफ़र।

एक सफ़र।

निकली जो सड़क पता नहीं किस ओर की थी..
मंज़िल क्या पता, पता नहीं किस छोर की थी..

भटकते से कंकड़ उनपे कुछ निखरे थे..
और ज़िन्दगी लड़खड़ायी अचानक एक भोर सी थी..

न रास्ते ख़त्म होने थे न आगे रुकना था..
फिर भी ज़िन्दगी की नब्ज़ किसी डोर सी थी..

बढ़ते कदम को घाव और नर्म एहसास भी मिले..
लेकिन मेरे हौसले का शोर पुरे ज़ोर की थी..

वक़्त आज़माता रहा मुझे के मेरी उम्र कम थी..
और मेरी किस्मत किसी ख़ुशक़िस्मत चोर सी थी..!!

Nikali jo sadak pata nahi kis oar ki thi..
Manzil kya pata, pata nahi kis chhor ki thi..

Bhatakte se kankad unpe kuchh nikhre the..
Aur zindagi ladkhadayi achanak ek bhor si thi..

Na raaste khatm hone the na aage rukna tha..
Fir bhi zindagi ki nabz kisi dor si thi..

Badhte kadam ko ghaaw aur narm ehsaas bhi mile..
Lekin mere hausle ka shor pure zor ki thi..

Waqt aazmaata raha mujhe ke meri umra kam thi..
Aur meri kismat kisi khushkismat chor si thi..!!

#Abhilekh

Saturday, 10 October 2015

Pre tuned Lyric: हम तुम!

हम तुम..!

Kuch tum socho kuch hum soche,
Fir khushi ka mausam aaye..
Rahna nahi ab kahin bhi tere bin,
Duri aao milke bhulaaye..
In duriyon ko aao sajaa den.
Chhu ke labon ko sabkuch bhulaa den..
Aur iss bahane..
Ek apna jahaan banaayen..!!
Tum se hai.. tum mein hai..
Mai aur meri ye dunia..
Tum saath rahna, harpal mere..
Fir kya hai ye dunia..
Rumaani tum, Rumaani hum..
Aur hosh apne gum ho jaayen..
Mausam ko aao thoda  bahkaayen..
Apne rang mein jahaan ko bhulaayen..
In duriyon ko aao sajaa den.
Chhu ke labon ko sabkuch bhulaa den
Aur iss bahane..
Ek apna jahaan banaayen..!!

कुछ तुम सोचो, कुछ हम सोचें, 
फिर ख़ुशी का मौसम आए..!
रहना नहीं अब कहीं भी तेरे बिन,
दुरी आओ मिल के भुलाएँ..!
इन दूरियों को, आओ सजा दें..
छु के लबों को, सब कुछ भुला दें.. और इस बहाने,
एक अपना जहाँ बनाएँ..!!
तुम से है, तुम में है..
मैं और मेरी ये दुनिया..!
तुम साथ रहना, हर पल मेरे..
फिर क्या है ये दुनिया..!
रूमानी तुम, रूमानी हम..
और होश अपने, गुम हो जाएँ..!
मौसम को आओ थोड़ा बहकाएँ,
अपने रँग में जहाँ को भुलाएँ..
इन दूरियों को, आओ सजा दें..
छु के लबों को, सब कुछ भुला दें...और इस बहाने,
एक अपना जहाँ बनाएँ..!!
©Abhilekh

This song is based on Sonu Nigam's album song with same title.

Thursday, 8 October 2015

Lyrics: ज़िन्दगी सी तुम....!!

ज़िन्दगी सी तुम...
Milo tum aksar kuch alag andaaz se..
Ya to zindagi ban ke. Ya manzil ban ke.
Milkar fir thahar jao alag andaaz se..
Ya to manzar ban ke. Ya lamha ban ke.

मिलो तुम अक्सर कुछ अलग अंदाज़ से..
या तो ज़िन्दगी बन के, या मंज़िल बन के..!
मिलकर फिर ठहर जाओ अलग अंदाज़ से..
या तो मंज़र बन के, या लम्हा बन के..!!

Zindagi ban gayi to manzil bhi mil jayegi..
Tere saath bitaaye lamhe..
Khud misaal-e-manzar kahlaayegi..!
Tum bikharna bhi to mujhpe hi bikharna..
Ya to libaas ban ke. Ya jism ban ke.
Aur simatnaa bhi mujhme befikar hokar..
Ya to rooh ban ke. Ya saans ban ke.

ज़िन्दगी बन गयी तो मंज़िल भी मिल जायेगी..
तेरे साथ बिताये लम्हे,
खुद मिसाल-ए-मंज़र कहलाएगी..!
तुम बिखरना भी तो मुझपे ही बिखरना..
या तो लिबास बन के, या जिस्म बन के..!
और सिमटना भी मुझमे बेफिक्र होकर..
या तो रूह बन के, या साँस बन के..!!

Tere tasawuur mein guzra har waqt kamyaab  hai.
Kis lafz mein tujhe bayaan karun..
Tera naam to har dua se naayaab hai..!
Ab apni but-parasti se mujhe azaad karo..
Ya to khudaa ban ke. Ya to ham-saya ban ke.
Ek aadat si meri zindagi mein shaamil ho jao..
Ya to alfaaz ban ke. Ya koi dua ban ke..!

तेरे तस्सवुर में गुज़रा हर वक़्त कामयाब है..
किस लफ्ज़ में तुझे बयाँ करूँ,
तेरा नाम तो हर दुआ से नायाब है..!
अब अपनी बुत-परस्ती से मुझे आज़ाद करो..
या तो खुदा बन के, या तो हम-साया बन के..!
एक आदत सी मेरी ज़िन्दगी में शामिल हो जाओ..
या तो अल्फ़ाज़ बन के, या कोई दुआ बन के..!!

©Abhilekh

Wednesday, 7 October 2015

Lyrics: एक बूँद रुमानियत की...!!

Bhigi zulf se wo bhiga ehsaas tapka hai..
Gardan ko chumte huye teri peeth pe bikhra hai..
Bhigo ke tere ang aur libaas ko..
Mere hi imaan mein sharaarat ko ghola hai..!

Hataa dun libaas ya chum lun us boond ko..
Ya chum kar tumhe jala dun us boond ko..
Bagawaat ki raah pe wo qaafir,
Badi besharmi se teri kamar ko oar pighla hai..!

Apni harkaton ko aaj tum thahar jaane do..
Is nasheman ko aaj wahin sawanr jaane do..
Karib aakar gunaahon ke bahaane,
Us qatre mein aaj maine rumaaniyat ko ghola hai..!

भीगी ज़ुल्फ़ से वो भीगा एहसास है..
गर्दन को चूमते हुए तेरी पीठ पे बिखरा है..
भिगो के तेरे अँग और लिबास को,
मेरे ही ईमान में शरारत को घोला है..!

हटा दूँ लिबास या चूम लूँ उस बूँद को..
या चूम कर तुम्हे, जला दूँ उस बूँद को..
बगावत की राह पे वो क़ाफ़िर,
बड़ी बेशर्मी से तेरी कमर की ओर पिघला है..!

अपनी हरकतों को आज तुम ठहर जाने दो..
इस नशेमन को आज, वहीँ सवँर जाने दो..
करीब आकर गुनाहों के बहाने,
उस कतरे में आज मैंने रुमानियत को घोला है..!

©Abhilekh
#Abhilekh

Tuesday, 6 October 2015

Pre tuned Lyric... इश्क़ क्या है...

Try this on song's tune: Khubsurat hai wo itna.. Movie: Rog.
Ishq kya marz hai aur kyu hai..
Kaha nahi jata..
Qaid mein iske kyu sab hain..
Kaha nahi jata..
Ishq fitur hai ye jaante hain ham lekin..
Bina uljhe isse raha nahi jata..!
Wo jo gum hokar bhi hai mujhme..
Kyu wo dikhta nahi..
Har khayaalon mein wo gusum hai..
Kuch kyu kahta nahi..
Kore kaagaz pe bhi likh ke, kaha nhi jata..
Aur bina lik'khe is dil ko, raha nahi jata..!!

इश्क़ क्या मर्ज़ है और क्यूँ है.. कहा नहीं जाता...
क़ैद में इसके क्यूँ सब है.. कहा नहीं जाता...
इश्क़ फितूर है ये जानते हैं हम लेकिन..
बिना उलझे इस से रहा नहीं जाता..!
वो जो गुम होकर भी है मुझमें..क्यूँ वो दिखता नहीं..
हर ख्यालों में वो गुमसुम है.. कुछ क्यूँ कहता नहीं..
कोरे कागज़ पे भी लिख के, कहा नहीं जाता..
और बिना लिखे इस दिल को, रहा नहीं जाता..!!
#Abhilekh

Saturday, 3 October 2015

Lyrics: रुमानियत!!

तू घुल चुकी थी साँसों में..
और मैं तुझपे सराबोर था...

शबनमी जिस्म थी तर-ब-तर..
और रुमानियत का आलम पुरज़ोर था...!

मैं पीता रहा तुझे क़तरा क़तरा..
तेरी हर घूँट में दबा सा शोर था...
जिस्म की सर्द रातें लिपटी रही..
साँसों की गर्मी से रागों में एक भोर था...!

तू पिघल कर बिस्तर सी रही..
और मैं तुझ में गुमशुदा हर ओर था...
अंगड़ाई की पहली पहर ली तुमने..
और लबों में ज़िन्दगी दबाये मोहब्बत मेरी ओर था।

©Abhilekh
#Abhilekh

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Complicated माहौल में simple सा बंदा हूँ। दूरियाँ तो जायज़ है फिर भी ऐसे हमेशा करीब हूँ। कुछ लिख कर, कुछ पढ़कर, सबसे कुछ सीख कर, अकेला ही सही, एक मंज़िल के लिए निकला हूँ।